लेखकों के 'अवार्ड वापसी' करने के विरोध में 'किताब वापसी अभियान' तेज हो गया है। अभियान की शुरुआत में ही इससे हजारों लोग जुड़ गए हैं। यह अभियान साहित्यकारों और लेखकों के अवार्ड वापसी करने के समकक्ष शुरु किया गया है। इससे पहले साहित्यकारों ने कलबुर्गी हत्याकांड के विरोध और दादरी घटना के बाद केंद्र सरकार को घेरने के लिए पुरस्कार लौटाना शुरू किया था।
इस अभियान में कहा जा रहा है कि जिन लेखकों ने सम्मान लौटाया है उनकी किताबें अगर लोगों के पास हैं तो उन्हें लौटा दिया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लेखक पुरस्कार लौटाकर राजनीति कर रहे हैं।
अभियान में उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी, कृष्णा सोबती, मंगलेश डबराल, जी एन देवी, नयनतारा सहगल, केकी दारुवाला, अनिल जोशी, वरियम सिंह संधु, सुरजीत पातर, जसविन्दर, गुरबचन भुल्लर, आतमजीत, बलदेव सिंह, दर्शन बत्तर, अजमेर सिंह औलख, मोहन भंडारी, प्रगट सिंह सतौज, नंद भारद्वाज, कुम वीरभद्रप्पा, रहमत तारिकी, गुलाम नबी ख्याल, मुनव्वर राना, सारा जोसेफ, होमेन बरगोहेन और कात्यानी विदमहे आदि के नाम शामिल हैं।
इस अभियान में कई लेखक, पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट जुड़ चुके हैं। इसमें से कुछ प्रमुख नाम हैं संजीव बेंगानी, सुरेश चिपलुणकर और अनिल पांडेय और आशीष कुमार अंशु। अभियान से जुड़े संजीव सिन्हा ने कहा कि सम्मान लौटानेवाले साहित्यकार राजनीति कर रहे हैं। वे देश का माहौल खराब कर रहे हैं और पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं।
सिन्हा ने कहा कि ये जन से कटे हुए लेखक हैं और जनादेश का असम्मान कर रहे हैं। इसलिए ऐसे साहित्यकार की किताब हम अपने पास नहीं रखना चाहते और उन्हें लौटा देना चाहते हैं। मुहिम में लगे शिवानंद द्विवेदी सहर का कहना है कि जो साहित्यकार सम्मान वापस कर रहे हैं या वापसी का समर्थन कर रहे हैं उनकी किताबों को वापस करने को लेकर पाठक मन बना चुके हैं। किताब वापसी अभियान पाठकों का अभियान है।
अभियान के फेसबुक पेज पर जानकारी दी गई है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार अब तक 1,110 लोगों को दिया गया है, जिसमें 536 लोग जीवित हैं। इनमें 26 साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है। बाल साहित्य की श्रेणी में 144 लेखकों को पुरस्कृत किया गया। जिनमें 128 लेखक जीवित हैं। इसमें सिर्फ एक लेखक ने अपना पुरस्कार लौटाया है। अनुवाद में 500 लेखकों को सम्मानित किया गया है। सभी अनुवादक जीवित हैं। तीन लेखकों ने पुरस्कार लौटाया है।
युवा पुरस्कार 111 लेखकों दिया गया है। उनमें सिर्फ एक लेखक ने पुरस्कार लौटाने की सूचना ई-मेल के माध्यम से अकादमी को दी है। पुरस्कार लौटाया नहीं है। वैसे अकादमी ने सम्मान लौटाने वाले लेखकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनसे यह आग्रह किया गया है कि वे अपने सम्मान वापसी पर पुनर्विचार करें।
इस अभियान में कहा जा रहा है कि जिन लेखकों ने सम्मान लौटाया है उनकी किताबें अगर लोगों के पास हैं तो उन्हें लौटा दिया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लेखक पुरस्कार लौटाकर राजनीति कर रहे हैं।
अभियान में उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी, कृष्णा सोबती, मंगलेश डबराल, जी एन देवी, नयनतारा सहगल, केकी दारुवाला, अनिल जोशी, वरियम सिंह संधु, सुरजीत पातर, जसविन्दर, गुरबचन भुल्लर, आतमजीत, बलदेव सिंह, दर्शन बत्तर, अजमेर सिंह औलख, मोहन भंडारी, प्रगट सिंह सतौज, नंद भारद्वाज, कुम वीरभद्रप्पा, रहमत तारिकी, गुलाम नबी ख्याल, मुनव्वर राना, सारा जोसेफ, होमेन बरगोहेन और कात्यानी विदमहे आदि के नाम शामिल हैं।
इस अभियान में कई लेखक, पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट जुड़ चुके हैं। इसमें से कुछ प्रमुख नाम हैं संजीव बेंगानी, सुरेश चिपलुणकर और अनिल पांडेय और आशीष कुमार अंशु। अभियान से जुड़े संजीव सिन्हा ने कहा कि सम्मान लौटानेवाले साहित्यकार राजनीति कर रहे हैं। वे देश का माहौल खराब कर रहे हैं और पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं।
सिन्हा ने कहा कि ये जन से कटे हुए लेखक हैं और जनादेश का असम्मान कर रहे हैं। इसलिए ऐसे साहित्यकार की किताब हम अपने पास नहीं रखना चाहते और उन्हें लौटा देना चाहते हैं। मुहिम में लगे शिवानंद द्विवेदी सहर का कहना है कि जो साहित्यकार सम्मान वापस कर रहे हैं या वापसी का समर्थन कर रहे हैं उनकी किताबों को वापस करने को लेकर पाठक मन बना चुके हैं। किताब वापसी अभियान पाठकों का अभियान है।
अभियान के फेसबुक पेज पर जानकारी दी गई है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार अब तक 1,110 लोगों को दिया गया है, जिसमें 536 लोग जीवित हैं। इनमें 26 साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है। बाल साहित्य की श्रेणी में 144 लेखकों को पुरस्कृत किया गया। जिनमें 128 लेखक जीवित हैं। इसमें सिर्फ एक लेखक ने अपना पुरस्कार लौटाया है। अनुवाद में 500 लेखकों को सम्मानित किया गया है। सभी अनुवादक जीवित हैं। तीन लेखकों ने पुरस्कार लौटाया है।
युवा पुरस्कार 111 लेखकों दिया गया है। उनमें सिर्फ एक लेखक ने पुरस्कार लौटाने की सूचना ई-मेल के माध्यम से अकादमी को दी है। पुरस्कार लौटाया नहीं है। वैसे अकादमी ने सम्मान लौटाने वाले लेखकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनसे यह आग्रह किया गया है कि वे अपने सम्मान वापसी पर पुनर्विचार करें।

No comments:
Post a Comment