Tuesday, 3 November 2015

असहिष्णुता के खिलाफ राष्ट्रपति से मिलने पैदल पहुंची कांग्रेस

देश में 'बढ़ती असहिष्णुता' के मसले पर कांग्रेस ने मंगलवार को संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकाला। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में यह मार्च संसद की गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ। कड़ी सुरक्षा में निकाले गए मार्च में शामिल पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कई सीनियर कांग्रेसी नेताओं ने हाथों मोदी सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए तख्ती ले रखा था।

कांग्रेस ने पहले महात्मा गांधी को गोली मारे जाने वाली जगह से मार्च निकालने की इजाजत मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी थी।

कांग्रेस के 11 बड़े नेताओं का प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। इन नेताओं में सोनिया, राहुल के अलावा लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे। ज्ञापन में कहा गया है कि देश में असहिष्णुता का माहौल खत्म करने के लिए राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करें।

सोनिया गांधी ने सोमवार को भी राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। सोनिया ने उन्हें बताया था कि कांग्रेस के नेता एक मार्च निकालकर उनसे इसलिए मिलना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि देश में सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की मुहिम चलाई जा रही है।

कथित असहिष्णुता के मसले पर कांग्रेस बेहद आक्रामक रवैया अपनाने वाली है। संसद के शीतकालीन सत्र में भी पार्टी इस मामले पर मोदी सरकार को घेरेगी।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस मार्च से बिहार में 5 नवंबर को होने वाले आखिरी चरण के मतदान पर भी असर पड़ेगा। इसका महागठबंधन को फायदा हो सकता है। बिहार चुनाव के इस चरण में मुस्लिम बहुल इलाकों कटिहार, पूर्णियां, किशनगंज और अररिया यानी सीमांचल में मतदान होने वाला है।

कांग्रेस के पैदल मार्च पर भाजपा ने जमकर निशाना साधा है। उसके प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि एक तरफ भारत आगे बढ़ रहा है, लेकिन सोनिया गांधी कुंठा में मार्च कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध मार्च कुंठा का मार्च है। कांग्रेस के लोग जब भी सत्ता से बाहर होते हैं तो कुंठित हो जाते हैं।

इसपर जवाब देते हुए कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह विरोध नहीं, देश की आत्मा की पीड़ा है। लेकिन यह सरकार अंधी, बहरी और गूंगी है। मोदी सरकार को भूख, आंसू, पीड़ा समझ नहीं आती।

कांग्रेस का यह पैदल मार्च साहित्यकारों, कलाकारों, लेखकों और वैज्ञानिकों की ओर से अवार्ड वापसी के बाद हुआ है।

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