सीनियर गवर्नमेंट पोस्ट पर IAS के प्रभुत्व को खत्म करने के लिए बाकी ग्रुप ए सविर्सेज ने एक याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में साल 1995 के बाद से IAS लॉबी का दबदबा रहा है। इसके साथ उन्होंने कहा कि ज्वॉइंट सेक्रेट्री पदों पर सबसे ज्यादा भर्तियां IAS से होती हैं।
IAS की भर्ती को अच्छे ग्रेड की वजह से हरी झंडी मिल जाती है, जिससे ग्रुप ए की बाकी सेवाओं के कर्मचारियों के साथ पक्षपात होता है। सरकारी पदों में IAS का दबदबा ज्वाइंट सेक्रेट्री पद से ही देखने को मिल जाता है। साल 1972 में सेक्रेट्री की 45 पोस्ट्स में 30 IAS अधिकारी से थे। जबकि 15 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज से शामिल किए गए थे। वहीं, साल 1984 में 36 IAS और 25 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज से थे।
बाकी ग्रुप ए सर्विसेज को आस
अन्य ग्रुप ए सर्विसेज उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के स्पेशलाइजेशन को ज्यादा जोर देने पर यह दबदबा खत्म हो सकेगा। 36 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज ने एक याचिका में 7वें वेतन आयोग को IAS के प्रभुत्व को खत्म करने और मेरिट को एक मौका देने के लिए कहा है।
कायम रही लॉबी
भारत सरकार के टॉप पोस्ट में IAS का प्रभुत्व आजादी के बाद घटा, लेकिन 1995 के बाद IAS लॉबी ने दोबारा अपने दबदबे को कायम करते हुए 92 सेक्रेट्री की पोट्स में 71 पोस्ट हासिल की।
ये था कारण
सरकारी विभागों में IAS के प्रभुत्व का कारण लिस्ट में नाम लिखने वालों और सेलेक्शन अथॉरिटीज का था। यहां तक कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) और कैबिनेट सेकेट्रिएट पर भी IAS अफसरों का प्रभुत्व का था।
IAS के दिन बहुरे
बीते दशकों में IAS अधिकारियों के लिए हालात अच्छे हुए हैं। केंद्र सरकार में अभी 91 सेक्रेट्री पोस्ट पर 73 IAS से हैं। 11 साइंटिस्ट हैं और बाकी के सात अन्य ग्रुप ए सेवाओं से हैं। इनमें IPS, IRS, IAAS या IRAS शामिल हैं।
JS से दबदबे की शुरुआत
IAS के प्रभुत्व की शुरुआत सीधे ज्वॉइंट सेकेट्री (JS) लेवल से होती है। ग्रुप ए सेवाओं की 7वें वेतन आयोग को सौंपी गई याचिका के मुताबिक वर्तमान में लगभग 75 फीसदी ज्वाइंट सेक्रेट्री, 85 फीसदी एडिशनल सेक्रेट्रीज और 90 फीसदी से ज्यादा सेक्रेट्रीज IAS से शामिल किए गए हैं।
इंजीनियर-डॉक्टर भी हिस्सा
साल दर साल नौकरशाही के हालात में तब्दीलियां हुई हैं। अब, ज्यादातर इंजीनियर, डॉक्टर और MBA ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS, IPS और IFS) और अन्य ग्रुप ए सर्विसेज में शामिल हो रहे हैं। IAS के लिए कोई अलग से परीक्षा नहीं होती है। जिनका भी ज्यादा ग्रेड होता है, उन्हें इस सेवा में शामिल किया जाता है।
PMO का टैलेंट पर जोर
प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर सूत्रों ने बताया कि पीएमओ सभी सेवाओं में बराबरी पर जोर देगा और सीनियर पोस्ट के लिए टैलेंट को प्राथमिकता देगा। पीएमओ ने DoPT को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ग्रुप ए सेवाओं के सभी अफसरों को समय रहते लिस्ट में शामिल किया जाए।
IAS की भर्ती को अच्छे ग्रेड की वजह से हरी झंडी मिल जाती है, जिससे ग्रुप ए की बाकी सेवाओं के कर्मचारियों के साथ पक्षपात होता है। सरकारी पदों में IAS का दबदबा ज्वाइंट सेक्रेट्री पद से ही देखने को मिल जाता है। साल 1972 में सेक्रेट्री की 45 पोस्ट्स में 30 IAS अधिकारी से थे। जबकि 15 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज से शामिल किए गए थे। वहीं, साल 1984 में 36 IAS और 25 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज से थे।
बाकी ग्रुप ए सर्विसेज को आस
अन्य ग्रुप ए सर्विसेज उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के स्पेशलाइजेशन को ज्यादा जोर देने पर यह दबदबा खत्म हो सकेगा। 36 अन्य ग्रुप ए सर्विसेज ने एक याचिका में 7वें वेतन आयोग को IAS के प्रभुत्व को खत्म करने और मेरिट को एक मौका देने के लिए कहा है।
कायम रही लॉबी
भारत सरकार के टॉप पोस्ट में IAS का प्रभुत्व आजादी के बाद घटा, लेकिन 1995 के बाद IAS लॉबी ने दोबारा अपने दबदबे को कायम करते हुए 92 सेक्रेट्री की पोट्स में 71 पोस्ट हासिल की।
ये था कारण
सरकारी विभागों में IAS के प्रभुत्व का कारण लिस्ट में नाम लिखने वालों और सेलेक्शन अथॉरिटीज का था। यहां तक कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) और कैबिनेट सेकेट्रिएट पर भी IAS अफसरों का प्रभुत्व का था।
IAS के दिन बहुरे
बीते दशकों में IAS अधिकारियों के लिए हालात अच्छे हुए हैं। केंद्र सरकार में अभी 91 सेक्रेट्री पोस्ट पर 73 IAS से हैं। 11 साइंटिस्ट हैं और बाकी के सात अन्य ग्रुप ए सेवाओं से हैं। इनमें IPS, IRS, IAAS या IRAS शामिल हैं।
JS से दबदबे की शुरुआत
IAS के प्रभुत्व की शुरुआत सीधे ज्वॉइंट सेकेट्री (JS) लेवल से होती है। ग्रुप ए सेवाओं की 7वें वेतन आयोग को सौंपी गई याचिका के मुताबिक वर्तमान में लगभग 75 फीसदी ज्वाइंट सेक्रेट्री, 85 फीसदी एडिशनल सेक्रेट्रीज और 90 फीसदी से ज्यादा सेक्रेट्रीज IAS से शामिल किए गए हैं।
इंजीनियर-डॉक्टर भी हिस्सा
साल दर साल नौकरशाही के हालात में तब्दीलियां हुई हैं। अब, ज्यादातर इंजीनियर, डॉक्टर और MBA ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS, IPS और IFS) और अन्य ग्रुप ए सर्विसेज में शामिल हो रहे हैं। IAS के लिए कोई अलग से परीक्षा नहीं होती है। जिनका भी ज्यादा ग्रेड होता है, उन्हें इस सेवा में शामिल किया जाता है।
PMO का टैलेंट पर जोर
प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर सूत्रों ने बताया कि पीएमओ सभी सेवाओं में बराबरी पर जोर देगा और सीनियर पोस्ट के लिए टैलेंट को प्राथमिकता देगा। पीएमओ ने DoPT को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ग्रुप ए सेवाओं के सभी अफसरों को समय रहते लिस्ट में शामिल किया जाए।

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