राम का जन्म आज के अयोध्या में नहीं हुआ था। बल्कि राम की जन्मभूमि उत्तर पश्चिम भारत या फिर पाकिस्तान
राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में AIMPLB भी एक पक्ष है। कुरैशी और फारुखी ने फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपिसोड (मिथ ऑफ राम जन्मभूमि) किताब लिखी है। इस किताब में दावा किया गया है कि वेदों या पुराणों में कहीं भी राम की जन्मभूमि गंगा के इलाके में नहीं बताया गया है। इनके अनुसार राम का जन्म सप्तसिंधु के इलाके में हुआ था। सप्तसिंधु हरियाणा और पंजाब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पूर्वी इलाकों तक फैला हुआ है। इसलिए अयोध्या राम की जन्मभूमि है ही नहीं।
हिंदू युग की गणनाओं के हिसाब से राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। रामायण के फैक्ट के आधार पर इसका कैलकुलेशन किया गया है। इस आधार पर 5561 ईसा पूर्व या फिर 7323 ईसा पूर्व में हुआ होगा। इस काल में अयोध्या और उत्तर प्रदेश के दूसरे इलाकों में मनुष्य ही नहीं थे। इन इलाकों में 600 ईसा पूर्व से मनुष्यों की आबादी की जानकारी है। किताब में ऐसे ही कई अन्य तथ्य दिए गए हैं और इसके आधार पर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद है ही नहीं।
कुरैशी ने कहा है कि दरअसल ये विवाद ब्रिटिश शासन की देन है जिसपर हम लड़ रहे हैं। ब्रिटिश सरकार ने राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की झूठी अफवाह फैलाई थी। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। इसे लेकर बोर्ड देशभर के हिंदू नेताओं से मिलेगा। बात-चीत से मामला सुलझ सकता है। इसके लिए लोगों को जागरुक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारा मकसद कोर्ट के फैसले को प्रभावित करने का नहीं है। हम केवल लोगों को सच बताना चाहते हैं। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
किताब में मस्जिद निर्माण पर एक भी बात नहीं लिखी गई है। ये दावा है आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का। बोर्ड के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी अब्दुल रहीम कुरैशी और कार्यकर्ता कमाल फारुखी ने एक किताब में इसका जिक्र किया है।
राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में AIMPLB भी एक पक्ष है। कुरैशी और फारुखी ने फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपिसोड (मिथ ऑफ राम जन्मभूमि) किताब लिखी है। इस किताब में दावा किया गया है कि वेदों या पुराणों में कहीं भी राम की जन्मभूमि गंगा के इलाके में नहीं बताया गया है। इनके अनुसार राम का जन्म सप्तसिंधु के इलाके में हुआ था। सप्तसिंधु हरियाणा और पंजाब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पूर्वी इलाकों तक फैला हुआ है। इसलिए अयोध्या राम की जन्मभूमि है ही नहीं।
हिंदू युग की गणनाओं के हिसाब से राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। रामायण के फैक्ट के आधार पर इसका कैलकुलेशन किया गया है। इस आधार पर 5561 ईसा पूर्व या फिर 7323 ईसा पूर्व में हुआ होगा। इस काल में अयोध्या और उत्तर प्रदेश के दूसरे इलाकों में मनुष्य ही नहीं थे। इन इलाकों में 600 ईसा पूर्व से मनुष्यों की आबादी की जानकारी है। किताब में ऐसे ही कई अन्य तथ्य दिए गए हैं और इसके आधार पर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद है ही नहीं।
कुरैशी ने कहा है कि दरअसल ये विवाद ब्रिटिश शासन की देन है जिसपर हम लड़ रहे हैं। ब्रिटिश सरकार ने राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की झूठी अफवाह फैलाई थी। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। इसे लेकर बोर्ड देशभर के हिंदू नेताओं से मिलेगा। बात-चीत से मामला सुलझ सकता है। इसके लिए लोगों को जागरुक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारा मकसद कोर्ट के फैसले को प्रभावित करने का नहीं है। हम केवल लोगों को सच बताना चाहते हैं। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
किताब में मस्जिद निर्माण पर एक भी बात नहीं लिखी गई है। ये दावा है आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का। बोर्ड के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी अब्दुल रहीम कुरैशी और कार्यकर्ता कमाल फारुखी ने एक किताब में इसका जिक्र किया है।

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