Showing posts with label Daily news. Show all posts
Showing posts with label Daily news. Show all posts

Thursday, 5 November 2015

17 साल की उम्र में हासिल की दो डिग्रियां

कैलिफोर्निया के 17 साल के मोशे काई कावलीन के पास दो डिग्रियां हैं। कावलीन ने 11 साल की उम्र में कम्युनिटी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। उसके बाद 15 साल की उम्र में लॉस एंजिल्स के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से मैथ में बैचलर्स की डिग्री हासिल की।

इस साल उन्होंने ब्रांडेस यूनिवर्सिटी से साइबर सिक्योरिटी में मास्टर्स करने के लिए ऑनलाइन क्लासेज लेना भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने एक किताब भी लिखी है। इसमें उन्होंने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए हैं। किताब में उन्होंने दूसरों से सुनी कहानियों को भी शामिल किया है। कावलीन का कहना है कि वह इस साल के आखिर तक पायलट का लाइसेंस लेने के लिए भी प्लान बना रहा है।

कावलीन की मां ताईवान और पापा ब्राज़ील से है। इनका कहना है कि कावलीन ने पढ़ाई बहुत जल्दी पूरी कर ली। वहीं कावलीन कहता है, 'मैं बहुत साधारण हूं। मेरा केस कोई खास नहीं है। यह बस पेरेंटिंग, मोटिवेशन और इंसपिरेशन का कॉम्बिनेशन है। एडवर्ड्स में नासा के आर्मस्ट्रांग फ्लाइट रिसर्च सेंटर में काम करने के दौरान मैं अपने आप को लोगों से कमपेयर करने लगा हूं। मैं कोशिश करता हूं कि अपना बेस्ट दूं'।

मैथ्स के प्रोफेसर डैनियल जज कहते हैं, 'मुझे लगता है ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कावलीन जीनियस है। यह स्वाभाविक रूप से आता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में उसने बहुत मेहनत की है। शायद ही किसी स्टूडेंट ने इतनी मेहनत की हो'।

कावलीन ने बताया, 'मुझे विश्वास नहीं हुआ कि जिस नासा ने उम्र की वजह से मुझे रिजेक्ट किया था उसने मुझे काम करने को बुलाया है'। नासा में कावलीन के बॉस और मेंटर अर्टीगाल का कहना है कि उनके प्रोजेक्ट के लिए कावलीन बिल्कुल परफेक्ट है। उन्हें एक ऐसे इंटर्न की जरूरत थी जिसे सॉफ्टवेयर मैथ्स अलॉगरिदम की समझ हो, साथ ही एक पायलट की जरूरत भी थी।

अर्टीगाल कहते है कि ऑफिस में वह बहुत शांत तरीके से काम करते हैं और उनके पास बहुत अचछा ह्यूमर है। ब्रांडैस यूनिवर्सिटी से मास्टर्स करने के बाद वह मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में बिजनेस में मास्टर करना चाहते है। वह साइबर सिक्योरिटी कंपनी भी शुरू करना चाहते है। फिलहाल वह अभी अपने 18वें जन्मदिन का इंतजार कर रहे है ताकि वह ड्राइवर का लाइसेंस हासिल कर पाए।

शेर तो शेर होता है, उसका कोई धर्म नहीं होता

क्या ऐसा हो सकता है कि अंडरवर्ल्ड का कोई धर्म हो और वे पैसे की वसूली से लेकर खून तक करने के पहले धर्म देखते हों?  किसी डॉन के बारे में सुना है कि वह अपने धर्म के लोगों को नहीं मारता हो और दूसरे धर्म के लोगों से दुश्मनी मोल लेता हो? ऐसा शायद कल्पना या फिल्मों में हो सकता है। डॉन या बड़े अपराधी का धर्म से कोई लेना-देना नहीं होता और वे पैसे के मामले में किसी के नहीं होते। मंदिर या मस्जिद से उनका नाता सिर्फ रस्मी होता है। कोई डॉन मंदिर में इसलिए मत्था टेकता है कि वह हिन्दू धर्म से जुड़ा है तो कोई मस्जिद में नमाज़ इसलिए पढ़ता है कि वह मुसलमान है और इस तरह से वह अपने अनुयायियों की तादाद बढ़ा सकता है। धर्म या मज़हब उनके लिए महज आस्था का सवाल है और उससे वे जुड़े हुए हैं।

अब अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद कई नेता और धर्म के ठेकेदार उसे हिन्दू धर्म का समर्थक बता रहे हैं और कह रहे हैं कि वह हिन्दू रक्षक है। साध्वी प्राची कह रही हैं कि वह हिंदू शेर है और वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ा। उसे मौका मिले तो पाकिस्तान में छिपे दाऊद की गर्दन पकड़ सकता है। ऐसा लगता है कि साध्वी और उन जैसे लोगों को यह पता नहीं कि छोटा राजन ही दरअसल वह मुजरिम है जिसने दाऊद इब्राहिम के पैर पसारने में मदद की थी। उसकी लोमड़ी जैसी बुद्धि और शूटर्स के गिरोह ने दाऊद को मुंबई में ताकत दी थी। ऐसी दलील देने वालों को यह भी मालूम नहीं है कि छोटा राजन दाऊद इब्राहिम का जिसे आतंकवादी बताया जाता है, दायां हाथ था। वह उसके सभी गुनाहों का साथी था और खुले आम वसूली करता था। उस पर मुंबई में 17 लोगों की हत्या का आरोप है जिसमें ज्यादातर हिन्दू ही थे। पत्रकार जे डे की हत्या राजन ने ही करवाई थी, यह बात सभी जानते हैं। ऐसे न जाने कितने नाम हैं।

छोटा राजन तो 1989 में दाऊद के पास दुबई चला गया था जहां दोनों में काफी मतभेद हो गए और वे एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। उसके बाद से राजन का रास्ता बदल गया लेकिन उसने अपराध और वसूली का काम नहीं छोड़ा। अगर वह देशभक्त या धर्म प्रेमी होता तो भारत आकर सरेंडर कर देता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह बाहर के देशों से ऑपरेट करता रहा और अपराध का अपना साम्राज्य चलाता रहा।

ऐसा सिर्फ हमारे देश में हो सकता है कि धर्म के आधार पर किसी माफिया डॉन को महिमा मंडित किया जाए। सिर्फ इसलिए कि वह हिन्दू है और दाऊद के गुर्गों को मरवाने में बड़ी भूमिका निभाई, उसे देशभक्त या महान नहीं कहा जा सकता है। यह तो देशभक्ति का अपमान होगा। एक बड़ा अपराधी कई तरह के रंग बदलता है और लोग उससे धोखा खा जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा हो रहा है। अपराधी का धर्म उसके चरित्र से जुड़ा नहीं होता। वैसे भी शेरों का कोई धर्म नहीं होता और शेर महज शेर होता है। उसे हिन्दू या मुसलमान की श्रेणी में डालना हास्यास्पद है।

Monday, 2 November 2015

'अवार्ड वापसी' के खिलाफ 'किताब वापसी अभियान' हुआ तेज

लेखकों के 'अवार्ड वापसी' करने के विरोध में 'किताब वापसी अभियान' तेज हो गया है। अभियान की शुरुआत में ही इससे हजारों लोग जुड़ गए हैं। यह अभियान साहित्यकारों और लेखकों के अवार्ड वापसी करने के समकक्ष शुरु किया गया है। इससे पहले साहित्यकारों ने कलबुर्गी हत्याकांड के विरोध और दादरी घटना के बाद केंद्र सरकार को घेरने के लिए पुरस्कार लौटाना शुरू किया था।

इस अभियान में कहा जा रहा है कि जिन लेखकों ने सम्मान लौटाया है उनकी किताबें अगर लोगों के पास हैं तो उन्हें लौटा दिया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लेखक पुरस्कार लौटाकर राजनीति कर रहे हैं।

अभियान में उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी, कृष्णा सोबती, मंगलेश डबराल, जी एन देवी, नयनतारा सहगल, केकी दारुवाला, अनिल जोशी, वरियम सिंह संधु, सुरजीत पातर, जसविन्दर, गुरबचन भुल्लर, आतमजीत, बलदेव सिंह, दर्शन बत्तर, अजमेर सिंह औलख, मोहन भंडारी, प्रगट सिंह सतौज, नंद भारद्वाज, कुम वीरभद्रप्पा, रहमत तारिकी, गुलाम नबी ख्याल, मुनव्वर राना, सारा जोसेफ, होमेन बरगोहेन और कात्यानी विदमहे आदि के नाम शामिल हैं।

इस अभियान में कई लेखक, पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट जुड़ चुके हैं। इसमें से कुछ प्रमुख नाम हैं संजीव बेंगानी, सुरेश चिपलुणकर और अनिल पांडेय और आशीष कुमार अंशु। अभियान से जुड़े संजीव सिन्हा ने कहा कि सम्मान लौटानेवाले साहित्यकार राजनीति कर रहे हैं। वे देश का माहौल खराब कर रहे हैं और पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं।

सिन्हा ने कहा कि ये जन से कटे हुए लेखक हैं और जनादेश का असम्मान कर रहे हैं। इसलिए ऐसे साहित्यकार की किताब हम अपने पास नहीं रखना चाहते और उन्हें लौटा देना चाहते हैं।  मुहिम में लगे शिवानंद द्विवेदी सहर का कहना है कि जो साहित्यकार सम्मान वापस कर रहे हैं या वापसी का समर्थन कर रहे हैं उनकी किताबों को वापस करने को लेकर पाठक मन बना चुके हैं। किताब वापसी अभियान पाठकों का अभियान है।

अभियान के फेसबुक पेज पर जानकारी दी गई है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार अब तक 1,110 लोगों को दिया गया है, जिसमें 536 लोग जीवित हैं। इनमें 26 साहित्यकारों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है। बाल साहित्य की श्रेणी में 144 लेखकों को पुरस्कृत किया गया। जिनमें 128 लेखक जीवित हैं। इसमें सिर्फ एक लेखक ने अपना पुरस्कार लौटाया है। अनुवाद में 500 लेखकों को सम्मानित किया गया है। सभी अनुवादक जीवित हैं। तीन लेखकों ने पुरस्कार लौटाया है।

युवा पुरस्कार 111 लेखकों दिया गया है। उनमें सिर्फ एक लेखक ने पुरस्कार लौटाने की सूचना ई-मेल के माध्यम से अकादमी को दी है। पुरस्कार लौटाया नहीं है। वैसे अकादमी ने सम्मान लौटाने वाले लेखकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनसे यह आग्रह किया गया है कि वे अपने सम्मान वापसी पर पुनर्विचार करें।

मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं था दिल्ली को सौंपा राजन

छोटा राजन से पूछताछ दिल्ली पुलिस के हवाले की गई है। मुंबई पुलिस के हाथ से लेकर मामला दिल्ली पुलिस को दिए जाने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। लेकिन सरकार ने दिल्ली पुलिस पर ज्यादा भरोसा दिखाया है।

इसकी एक वजह दिल्ली पुलिस का केंद्र के तहत होना भी है।

अधिकारियों ने बताया कि सरकार नहीं चाहती कि मुंबई पुलिस छोटा राजन से पूछताछ करे। राजन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए दाऊद के खिलाफ एक प्रमुख कड़ी है। वह दाऊद के बारे में कई अहम जानकारियां दे सकता है। राजन को बुधवार को दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा।

यह पूछताछ 2011 में दिल्ली में एक बिजनेस मैन को फिरौती की कॉल को लेकर दर्ज हुई FIR पर आधारित होगी। 2 लोगों की टीम ने पूछताछ के लिए सभी कागजात इकट्ठे कर लिए हैं। इनमें राजन के खिलाफ 6 दूसरी FIR शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस को मामला सौंपने पर अधिकारियों का कहना है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में मुंबई पुलिस का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। इसलिए केस दिल्ली पुलिस को दिया गया है।

साथ ही दिल्ली पुलिस के पास छोटा राजन और उसके गुर्गों के खिलाफ 7 मामले दर्ज हैं। पूछताछ के लिए स्पेशल सेल बनाया गया है। इस टीम में डीसीपी प्रमोद कुशवाहा, इंस्पेक्टर राहुल शामिल हैं।